अब मैं उन्हें खुश भी न देखूं तो प्यार कैसा।
वो लम्हा भी अजीब होता है जब कोई अपना, अपना नहीं रहता और उसकी यादें दिल से जाती नहीं।
बिछड़ना तक़दीर में था, वरना, कौन किसी को दिल से निकाल सकता है?
फिर एक दिन महसूस हुआ, बस वक़्त गुज़ारा गया था।
जब शब्द कम पड़ जाएँ, तब शायरी दिल का बोझ हल्का करती है।
हमने तुम्हारे बिना जीने का तरीका तो सीख लिया,
मैं तुझे भी रुला दू तेरे सितम सुना सुना कर…!
तू खुश है अपने जहां में, हम तन्हा बैठे हैं, तेरे बिना भी जी रहे हैं, पर जिंदा नहीं हैं।
अब तुझसे कुछ नहीं कहना, बस तेरा नाम भी दिल से मिटा दिया है।
कभी हमने सोचा था, तुम्हारे बिना जीना मुश्किल होगा,
यह जीने का तरीका भी अब तकलीफ दे ही रहा है।
दर्द ही सही, पर तेरा एहसास तो है, जो मेरे साथ नहीं, फिर भी मेरे पास तो है।
तेरी यादों के जख़्म और गहरे हो जाते हैं।
थक के बैठ जाऊं तो गले से लगा लेना ए जिंदगी अब किसी से उम्मीद नही रही हमें इस Sad Shayari फरेबी जमाने में